Thursday, 14 April 2011

देखने-पढ़ने से मन नहीं भरता अब-3


आज सुबह मैं जल्दी ही तैयार हो गया, बाइक बाहर निकाली और किरण को बुलाने के लिए उसके घर की घंटी बजा दी। वो तैयार ही थी, तुरन्त बाहर आ गई और साथ में राधा भाभी भी ऑफिस के लिए तैयार हो कर आ गई।
भाभी मुझसे बोली- मुझे देर हो रही है, मैं ऑफिस जा रही हूँ, मैंने कोचिंग की फीस किरण को दे दी है।
यह कहते हुए अपनी स्कूटी स्टार्ट की और चली गई। मैंने भी अपनी बाइक स्टार्ट की और किरण को बैठाकर चल दिया। किरण बाइक पर क्रास-लेग बैठी, रास्ते में उसकी बड़ी-2 चूचियाँ मेरी पीठ को कभी-2 छू जाती थी, खैर मैंने कोई खास ध्यान न देते हुए कोचिंग पहुँच कर उसका एड्मीशन करा दिया और वापस घर छोड़ दिया। और उसके बाद अपने ऑफिस चला आया।
ऑफिस में आज कोई खास काम नहीं था, मैं अपने पाठक दोस्तों से जो ऑन लाइन थे उनसे चैट करने लगा, खास तैर से रीमा से, उसके साथ मैं तकरीबन पिछले एक महीने से रोज चैटिंग कर रहा था। हालांकि मेरी और उसकी उम्र में काफी अन्तर था, वो 20-21 की और मैं 35 का, लेकिन मेरी उम्र से उसको कोई एतराज नहीं था बल्कि वो और ज्यादा अपने को मेरे साथ सुरक्षित महसूस करती है, उसका मानना है कि आदमी की परिपक्वता उसको अधिक रोमैन्टिक और सेक्स में अनुभवी बनाती है और खास तौर से लड़की की निजता और सुरक्षा दोनों ही बनी रहती हैं, इससे ज्यादा किसी लड़की को अपने यौन जीवन में और क्या चाहिए।
यह बात उसने तब कही थी जब मैंने अपनी पहली फोटो उसको भेजी थी। उसके बाद तो उससे मेरी बहुत अच्छी दोस्ती और अन्डरस्टैन्डिंग हो गई थी, उससे सभी तरह की चुदाई की बातें होती रहती थी। हम लोगों ने कई बार ऑन लाइन चुदाई का मजा भी लिया था, तब भी हम लोग इसी तरह की बात कर रहे थे।
वो कह रही थी कि देखने-पढ़ने से मन नहीं भरता, अब कुछ करने का मन करता है। तो मैंने उससे कहा- आज मौसम बहुत बेईमान है, बादल घिरे हैं, हल्की हल्की बरिश की फुहार पड़ रही है, मेरा मन बहुत रोमान्टिक हो रहा है, तुम थोड़ा मेरे पास आओ ना प्लीज़ !
वो बोली- अच्छा लो, मैं तुम्हारे पास आ गई।
मैंने कहा- इस हसीन मौसम में तुम बहुत रुमानी लग रही हो।
उसने कहा- जनाब आप का इरादा क्या है, मैं भी तो जानूँ?
मैंने कहा- मेरा दिल यह कह रहा है कि मैं तुम्हारी इन काली घटाओं जैसी ज़ुल्फों में खो जाऊं और तुम मेरी बाहों में समा जाओ और फ़िर हम दोनों दूर, इन बादलों के पार, प्यार के सागर में डूब जाएँ।
रीमा बोली- लो, मैं आपके ऑफिस आ गई और अब मैं तुम्हारी बाहों में हूँ !
फ़िर मैंने अपने होंठ उसके दहकते होठों पर रख दिये। वो मेरे से लिपट गई, मैंने उसे अपने आगोश में ले लिया और उसकी जुल्फों पर हाथ फेरने लगा।
वो अपनी नाजुक उंगलियों से मेरे बालों को सहलाने लगी, फिर वो अपनी रसीली जुबान मेरे मुँह के अन्दर डाल दी, मैंने भी उसका जवाब अपनी जुबान को उसके मुँह में डाल कर दिया। रसीले चुम्बन का दृश्य लगभग 8 मिनट तक खड़े खड़े चलता रहा। फिर हम लोग उसी दशा में थोड़ा सा चल कर सोफे पर एक साथ बैठ गए। अब हम लोगों के हाथ प्यार से एक दूसरे की पीठ सहला रहे थे।
करीब 5 मिनट के बाद वो मेरे से अलग हुई। मैंने देखा कि उसके होठों की लिपस्टिक अपने होठों और जुबान से मैं साफ कर चुका था। फिर उसने अपने हाथों से अपने होठों को पौंछा और फिर मेरी आँखों में बड़े प्यार से मुस्करा कर देखने लगी और बोली- मुझे नहीं पता था कि आप इतने रोमैन्टिक है ! नहीं तो मैं बहुत पहले आपके पास आ जाती।
इस पर मैंने प्यार से कहा- अरे मेरी अनारकली, यह तो सिर्फ खूबसूरत मुहब्बत की शुरुआत है, अभी तो जन्नत की सैर बाकी है।
इस पर उसने अपनी निगाहें झुका कर अपनी चूचियों की तरफ कर ली, और अपना बायां हाथ मेरी दाहिनी जांघ पर रख कर बोली- यह क़नीज़ आपकी तब से दीवानी है जब से आपने मुझे वीर्य निकलते हुए अपने लण्ड की फोटो मेल की थी। तब से मेरी यही ख़्वाहिश थी कि मैं आपके लण्ड को चूस-चूस कर उसके रस को पीकर मैं निहाल हो जाऊं, ताकि ज़िन्दगी भर उसी के नशे में डूबी रहूँ।
मैंने कहा- बस इतनी सी बात? लो, मैं अभी पूरी किए देता हूँ !
और मैं उसके सामने खड़ा हो गया और कहा- तुम खुद मेरी पैन्ट खोल कर अपनी ख़्वाहिश पूरी कर लो।
वो बोली- धत्त ! आप भी ना !
तो मैंने उसके दोनों हाथों को पकड़ कर अपनी जीन्स के बटन पर रख दिया और कहा- इसे खोलो ! और मेरे लण्ड को बाहर निकालो।
फिर उसने शरमाते हुऐ मेरी जीन्स को खोला और उसे नीचे कर दिया। स्प्रिंग की तरह मेरा खड़ा लण्ड ठीक उसके मुँह के सामने आ गया क्योंकि मैं अन्डरवियर पहनता ही नहीं हूँ,।अपने सामने मेरा खड़ा लण्ड देखते ही बोली- माई गॉड ! यह तो फोटो से भी बड़ा है।
फिर उसने अपने दाहिने हाथ से मेरे लण्ड को झिझकते हुए पकड़ लिया और धीरे से लण्ड की अग्र-त्वचा को थोड़ा नीचे किया, इससे गुलाबी सुपारा बाहर आ गया और उसको देखते ही उसके मुँह से अनायास ही निकल गया- आई लव दिस पिंक लॉलीपॉप।
मैंने तुरन्त कहा- लॉलीपॉप तो चूसने के लिए होता है !
इस पर उसने बड़े प्यार से मुस्कराते हुए मेरी आँखों में आँखें डाल कर देखते हुए हौले से गुलाबी सुपारा अपने मुँह में ले लिया और हल्के-2 अपनी जबान फिराने लगी।
और मैं थोड़ा झुक कर कुर्ते के बाहर से ही उसकी चूचियों को सहलाने लगा। धीरे धीरे वो उत्तेजित होने लगी और वह मेरे लण्ड को अपने मुँह के और अन्दर ले कर कस कर चूसने लगी। फिर मैंने उसके कुर्ते के गले से अपने दोनों हाथ अन्दर डाल दिये और उसकी चूचियों को दबाने लगा और दबाते दबाते चूचियों की घुन्डी को अपनी उंगलियों से मीसने लगा।
उसके मुँह से अचानक उह्ह्ह आह्ह्ह्ह की आवाज निकलने लगी और फिर उसने अपना बाएँ हाथ से सलवार के ऊपर से ही बुर को सहलाने लगी। इधर मेरा लण्ड और तन गया तो मैं उसके मुँह को ही धीरे धीरे चोदने लगा, और साथ ही अपनी शर्ट और बनियान उतार दी।
अब मैं पूरा नंगा था, उधर रीमा काफी उत्तेजित हो चुकी थी, उसकी बुर के सामने की सलवार पूरी गीली हो चुकी थी और मैं लगातार उसके मुँह को चोदे जा रहा था। उसके मुँह से उह्ह्ह आह्ह्ह्ह की घुटी-घुटी सी आवाजें और तेज निकलने लगी।
मैंने रीमा की दोनों चूचियाँ कस कर पकड़ते हुए कहा- मैं झड़ने वाला हूँ !
यह सुन कर वो मेरे लण्ड को और कस कर चूसने लगी। इतने में मेरा माल निकलने लगा और वो पूरा का पूरा पीती चली गई। जब पूरा वीर्य चट कर चुकी, फिर उसने अपने मुँह से मेरे लण्ड को अलग किया।
मैंने उससे पूछा- कैसा लगा मेरा रस?
वो बोली- इट वाज़ वेरी डिलीशियश ! मजा आ गया।
फिर मैंने उससे कहा- खड़ी हो जाओ।
वो खड़ी हो गई, मैंने उसका कुर्ता उतारा, फिर ब्रा, फिर सलवार उतारी। उसने पैन्टी नहीं पहनी हुई थी, वो गजब की माल लग रही थी। उसकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ, पतली कमर और बगैर बाल की बुर तो कमाल की लग रही थी। खुद को नंगा देखकर वो कुछ शरमाने लगी और अपनी बुर पर हाथ रख लिया और मुझसे बोली- मुझे शर्म आ रही है !
मैंने कहा- ओह्ह, अभी मैं तुम्हारी पूरी शर्म दूर किए देता हूँ ! पहले तुम बैठ जाओ !
तो वो सोफे पर अपनी बुर को हाथों से ढक कर बैठ गई।
मैंने उससे कहा- तुम कॉफी लोगी या कोल्ड ड्रिंक?
वो बोली- कुछ नहीं ! अभी तो मैंने लण्डजूस पिया है ! कोई और ड्रिंक से अपने मुँह का स्वाद खराब नहीं करना चाहती हूँ।
मैंने कहा- ओ के, रीमा जी ! लेकिन इस नाचीज़ को आप अपने बुर-रस से कब नवाज़ेंगी? मुझे भी तो स्वाद लेने का मौका दीजिए।
इस पर वो बोली- आपको किसने मना किया है? मैं और मेरा सब कुछ आपका है, जो कुछ करना है करिए। लेकिन थोड़ा जल्दी।
यह सुनते ही मैंने उसके पैर फैलाए और उसके हाथ बुर से अलग करते हुए मैं दोनों टांगों के बीच फर्श पर बिछी दरी पर बैठ गया, फिर मैंने उसे थोड़ा आगे अपनी ओर खींचा। जिससे वो करीब आधी लेटी हुई अवस्था में हो गई।
फिर मैंने अपनी एक उंगली उसकी बुर में घुसेड़ी, उसकी बुर अभी भी गीली थी तथा थोड़ा थोड़ा रस बह रहा था जोकि उसकी गाण्ड से होता हुआ सोफे पर जा रहा था। मैं तुरन्त अपनी जुबान बुर की दोनों फांकों के बीच लगा कर चाटने लगा, उसका स्वाद बड़ा सेक्सी था। बीच बीच में मैं अपनी दो उंगलियों को बुर में घुसेड़ कर जी प्वाइंट को रगड़ देता था, इस पर वो उचक जाती थी, अपनी आँख बन्द किए हुए बुर चुसाई का मजा ले रही थी, कभी कभी उसके मुँह से उह्ह्ह आह्ह्ह्ह की आवाज निकल जाती, साथ ही अपने एक हाथ से चूची सहला रही थी और दूसरे हाथ से मेरे सर को अपनी बुर पर दबाए जा रही थी।
अचानक वो बोली- कोई आया है ! मैं बाद में बात करुगीं और फिर रीमा ऑफलाइन हो गई।
इस तरह हम लोगों ने 11 बजे से 12:30 बजे तक ऑन लाइन वर्चुअल चुदाई का मजा लिया। मैंने भी मुट्ठ लगाने के बाद अपनी जीन्स पहन ली और ऑफिस के दूसरे काम करने लगा। बाहर ऑफिस में सभी लोग आ चुके थे।
लखनऊ 2-7-2010 समय: 6-30 शाम
ऑफिस के काम से अभी फुरसत मिली, मैंने सोचा चलो कुछ चैटिंग हो जाए, तो मैंने अपना याहू मैसेन्जर लॉग-इन किया। मेरे दो दोस्त ऑनलाइन थे, उनसे बात करने लगा।
अचानक रीमा भी ऑनलाइन हो गई। मैंने तुरन्त उसको मैसेज भेजा- सुबह कौन आया था?
तो उसने बताया- धोबी आया था !
मैंने कहा- यार, सुबह उस धोबी की वजह से मेरा के एल पी डी हो गया।
तो उसने लिखा- यह क्या होता है?
तो मैंने जवाब लिखा- खड़े लण्ड पर धोखा !
इस पर उसने लिखा- हह्ह्ह्ह्ह्हा हह्ह्ह्ह्ह्हा।
फिर हम लोग आम बात करने लगे और उसी में उसने मुझे बताया कि अब वो लखनऊ अपने भाई के साथ रहने आ गई है और टाइम्स कोचिंग में एड्मीशन आज ही ले लिया है।
मैंने पूछा- तुम लखनऊ में कहाँ रह रही हो?
तो उसने बताया- गोमती नगर में !
यह सुन कर मेरा माथा ठनका क्योंकि सिर्फ आज ही मैंने किरण का एड्मीशन टाइम्स में कराया था, मैंने उससे उसका असली नाम फिर पूछा तो उसने रीमा ही बताया, पहले भी यही बताया था, तो मुझे कुछ शक तो हुआ लेकिन मैंने उस पर विश्वास कर लिया।
मैंने फिर उससे कहा- अब तो हम लोग एक ही शहर क्यों, एक ही कॉलोनी में रहते हैं तो तुम हमसे कभी मिलो।
तो उसने कहा- समय आने पर मैं आप से जरूर मिलूँगी, आप का सेल नम्बर तो मेरे पास है ही, मैं आपको काल कर लूंगी, यह मेरा वादा है।
मैंने कहा- ठीक है।
फिर वो बोली- अब मैं ऑफलाइन हो रही हूँ क्योंकि भाभी आने वाली हैं। बाय !
यह पढ़ कर मैं खुश हो गया। मैंने सोचा कि चलो जल्दी ही मुलाकात होगी।
फिर मैंने सभी ऑनलाइन दोस्तों से विदा लेकर कम्प्यूटर बन्द किया और घर को रवाना हो गया।
कहानी जारी रहेगी।


देखने-पढ़ने से मन नहीं भरता अब-2


सुरेश मुस्कराते हुए बोला- वाह… और फिर राधा भाभी सुरेश के होठों को चूमने लगीं और फिर अपने पीठ के बल चित्त लेट गई।
इसके बाद सुरेश ने सामने से नाइटी खोल दी और एक चूची को चूसने लगा और अपने एक हाथ से उसकी चूत की खुजली मिटाने लगा। राधा भाभी की आँखें धीरे-धीरे बन्द होने लगी और अपनी टांगें और फैला दी।
इसके बाद सुरेश राधा के ऊपर लेट गया और होंठों से होंठ मिला कर चूमने लगा। राधा की चूचियाँ सुरेश के सीने के नीचे ऐसे दबी थी जैसे किसी हवा भरे गुब्बारे को दबा दिया गया हो और सुरेश की दोनों टांगें राधा की फैली टागों के बीच में थीं।
करीब 5 मिनट तक चुम्बन-दृश्य चलता रहा। फिर वो दोनों एक साथ ऊपर-नीचे होकर पल्टियाँ खाने लगे, सुरेश नीचे हुआ और राधा भाभी उसके ऊपर आ गई।
अब राधा भाभी उठीं, लेकिन सुरेश के लण्ड के ऊपर ही बैठी रहीं और फिर सुरेश की शर्ट उतारने लगीं। उसके बाद अपनी पूरी नाइटी भी उतार दिया, फिर नीचे लेटे सुरेश को चूने लगी। सुरेश ने अपने दोनों हाथों और पैरों से राधा को जकड़ लिया। थोड़ी देर बाद राधा भाभी अपने आप को सुरेश की पकड़ से अजाद कर लिया फिर उठी और सुरेश के बगल में बैठ कर उसका पजामा उतारने लगी।
अब सुरेश और राधा दोनों ही बिलकुल नंगे थे। सुरेश का लण्ड अभी पूरी तरह से खड़ा नहीं था इसलिए राधा भाभी ने लण्ड को पकड़ कर ऊपर-नीचे करने लगीं, फिर लण्ड का सुपाड़ा खोला और अपने मुँह में लेकर चूसने लगीं। सुरेश अपना एक हाथ बढ़ा कर राधा भाभी की चूची मीसने लगा और राधा भाभी ने अपने दूसरे हाथ से अपनी चूत की खुजली मिटाने लगी।
यह कार्यक्रम लगभग 2-3 मिनट ही चला होगा कि सुरेश का लण्ड पूरी तरह खड़ा हो गया। उसका लण्ड करीब 7 इन्च का होगा और काफी मोटा दिख रहा था। जोकि अब राधा भाभी के मुँह को चोद रहा था या कहें कि राधा भाभी ने सुरेश के लण्ड को अपने मुंह में कैद कर रखा था और लगातार उसको चूसे जा रहीं थीं। सुरेश के मुंह से आह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह की अवाजें निकल रही थी।
फिर सुरेश ने राधा भाभी से कहा- अब तुम मेरे ऊपर आ जाओ और मेरी तरफ अपनी पीठ करो और मेरा लण्ड अपनी चूत में डालो।
राधा भाभी ने वैसा ही किया।
फिर सुरेश ने कहा- अब तुम मेरे दोनों पैर पकड़ कर लण्ड को अपनी चूत में ऊपर नीचे करो जैसे तुम मुझे चोद रही हो।
राधा भाभी सुरेश के लण्ड पर उट्ठक-बैठक करने लगी और कभी कभी लण्ड पर बैठे ही बैठे अपनी कमर कस कर हिलाती। इस पर सुरेश आह्ह्ह्ह आह्ह्ह करने लगता। फिर अचानक राधा भाभी की स्पीड बढ़ गई और फिर मुझे लगा कि राधा भाभी या सुरेश या फिर दोनों ही झड़ रहे है क्योंकि सुरेश की झाटों पर काफी फेना सा इकट्ठा हो रहा था और राधा भाभी भी आह्ह्ह्ह ओह्ह्ह नोअअ कह रही थी। फिर सुरेश ने राधा भाभी को अपने ऊपर से अलग किया लेकिन ये क्या, सुरेश का तो लण्ड अभी भी खड़ा ही था। इसका मतलब राधा भाभी ही झड़ी थीं।
फिर सुरेश ने राधा भाभी से कहा- अब तुम कुतिया बन जाओ, मैं अभी झड़ा नहीं हूँ !
राधा भाभी ने कहा- सुरेश, प्लीज़ अब रहने दो ! मैं बहुत थक चुकी हूँ।
सुरेश बोला- यार. अभी तो मेरी शुरुआत है ! पहले तुम कुतिया बनो, फिर देखते हैं।
फिर राधा भाभी बोली- यार। वैसे तो तुम हफ्तों मुझे चोदते नहीं हो। और जब चोदना शुरू करते हो तो मुझे अधमरा कर देते हो।
इस पर सुरेश हंसने लगा और राधा भाभी को खुद ही कुतिया की अवस्था में करने लगा और राधा भाभी की एक टांग उठा कर बेड के सिरहाने लगा पटरे(हेड रेस्ट) पर रख दिया। अब राधा भाभी की अवस्था वैसे ही थी जैसे कुत्ते अपनी टांग उठा कर मूतते हैं।
फिर सुरेश राधा भाभी के पीछे गया और उसकी चूत को कुत्ते की तरह सूंघने लगा, फिर अपनी जीभ निकाल कर राधा भाभी की चूत को चाटने लगा। चाटते चाटते राधा भाभी की चूत से फिर पानी टपकने लगा। इसके बाद सुरेश अपने घुटने के बल खड़ा हुआ और अपना हलब्बी लण्ड एक हाथ से पकड़ कर एक ही झटके में राधा भाभी की चूत में घुसेड़ दिया और लगा चोदने।
सुरेश धक्के पे धक्के लगाये जा रहा था और हर धक्के पर राधा भाभी की चूत से भच्च्… की आवाज आती और उनके मुँह से ओह्ह्ह्ह येस… निकल जाता, साथ में उनकी लटकी बड़ी-2 चूचियाँ हिलोरें लेने लगती।
सुरेश का धक्का, राधा भाभी का ओह्ह्ह्ह येस…, और उनकी चूचियों का हिलोरें लेना यह सब बहुत ही ताल में चल रहा था। ये संगीतमय ऐक्शन करीब 10 मिनट तक चले, फिर सुरेश एकदम से चिल्लाते हुए बोला- आई एम कमिंग डार्लिंग !
और अपना लण्ड राधा भाभी की चूत से बाहर निकाल लिया। राधा भाभी तुरन्त मुड़ी और सुरेश का लण्ड अपने मुँह के हवाले कर लिया। फिर सुरेश राधा भाभी के मुँह को चोदने लगा और फिर राधा भाभी के मुँह में ही झड़ने लगा। राधा भाभी बड़े चाव से सारा का सारा वीर्य पी गई। और फिर बिस्तर पर ही दोनों टांगें फैला कर पेट के बल लेट गई। फिर बगल में सुरेश भी लेट गया और अपना एक हाथ राधा भाभी के चूतड़ों पर सहलाते हुए बोला- यार सुनो, तुम्हारी गाण्ड तो रह ही गई।
इस पर राधा भाभी बोली- यार तुम तो हद कर देते हो ! अब चुपचाप सो जाओ…चोदू कहीं के।
सुरेश ने हंसते हुए जवाब दिया- चलो आज तुमको माफ किया, तुम भी याद रखोगी कि किसी रईस चोदू से पाला पड़ा है।
फिर थोड़ी देर बाद सुरेश उठा और टीवी के उपर रखा कैमरा ऑफ किया और उसको वार्डरोब में रख दिया। और फिर सारी बत्तियाँ बुझाई और फिर शायद नंगे ही राधा भाभी के साथ सो गया होगा। क्योंकि अब कमरे में कुछ भी नहीं दिख रहा था।
यह सब देखने के बाद तो मेरी हालत बिलकुल खराब हो गई थी मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं था सिवाय मुट्ठ मारने के। मैं सीधे अपने वाशरूम गया और अपनी एक दूर की अनदेखी चैट फ्रेन्ड को फैन्ट्साइज़ किया और मुट्ठ मार कर सो गया।
आगे की कहानी अगले भाग में !


तीसरा कौन ?


सबसे पहले मेरे लंड की ओर से सभी भोसड़ों को सलाम। मेरा नाम विशाल मेरी उम्र 20 साल है। अन्तर्वासना में यह मेरी पहली कहानी है। मैं अन्तर्वासना को बहुत पसन्द करता हूँ इसलिये सोचा कि मैं भी अपनी सच्ची कहानी अन्तर्वासना में लिखूँ।
आपका ज्यादा समय न लेते हुए कहानी की ओर बढ़ते हैं।
मेरे परिवार में चार लोग हैं मैं, मेरे पापा, मेरी मॉम, और मेरे दादाजी। मेरे पापा एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट का व्यापार करते हैं इसलिए अकसर बाहर रहते हैं। मेरे दादाजी घर पर ही रहते थे, मेरी मॉम हाउस- वायफ हैं। मेरी मॉम बहुत सेक्सी हैं पूरी सोसाइटी के मर्द और लड़के उन पर लाइन मारते हैं। क्या मस्त चूचे, गाण्ड और उसका शरीर, जो कोई भी देखे बस देखता रह जाये !
लेकिन मैंने कभी उन्हें गन्दी नजरों से देखा नहीं था।मेरी मॉम बहुत सुन्दर थी लेकिन क्या फायदा ! उनको कोई सुख मिलता ही नहीं था। उन्हें तो दूसरों से चुदवाने का बहुत शौक था लेकिन दादाजी की वजह से वो कुछ नहीं कर पाती थी।
एक दिन पापा को किसी काम से बाहर जाना पड़ा और मैं उस दिन घर पर ही था। दोपहर को खाना खाने के बाद दादाजी अपने कमरे में सो गए और मैं अपने कमरे में जाकर कंप्यूटर पर सेक्स मूवी देखने लगा। मॉम घर का काम कर रही थी।
थोड़ी देर के बाद मॉम मेरे कमरे में आई तो मैं डर गया। मैंने तुरंत कम्प्यूटर बन्द कर दिया।
मॉम ने पूछा- क्या कर रहे हो विशाल ?
मैंने हड़बड़ाते हुए कहा- कुछ नहीं ! कम्प्यूटर पर अपना काम कर रहा हूँ।
मॉम ने कहा- ठीक है, मेरी कमर दर्द कर रही है, तू मुझे बाम लगा दे।
मैंने कहा- ठीक है, मैं आता हूँ !
और थोड़ी देर बाद मैं उनके कमरे में गया।
मॉम बिस्तर पर उलटी लेटी हुई थी, मैंने बाम की शीशी ली और मॉम की कमर पर लगाने लगा।
तभी मॉम ने कहा- मैं ब्लाऊज़ निकाल देती हूँ, तू ऊपर भी लगा दे।
और मॉम ने ब्लाऊज़ निकाल दिया।
मेरे तो होश उड़ गए, मेरा तुरंत खड़ा हो गया और आठ इंच का हो गया।
इससे पहले मैंने कभी मॉम को इन नजरों से नहीं देखा था, पर तभी मेरे मन उसे चोदने का ख्याल आया।
उन्होंने ब्लाउज़ के नीचे काले रंग की ब्रा पहनी थी। क्या लग रही थी- जैसे कोई बीस साल की लड़की मेरे सामने लेटी हो !
तभी मॉम ने कहा- ब्रा भी निकाल दे !
और मैंने ब्रा निकाल दी और मैं बाम लगाने लगा।
पर मैं अपने आप पर काबू नहीं रख पा रहा था और मैंने उनके पेटीकोट के अन्दर अपना हाथ डाल दिया।
मॉम ने कहा- क्या कर रहा है?
मॉम, मैं आपको चोदना चाहता हूँ।
और मॉम थोड़ी देर तक मुझे देखती रही और फ़िर कहा- दरवाजा बन्द करके आ ! तेरे दादाजी आ गए तो !
मैं दरवाजा बन्द करके मॉम से चिपक गया और कहने लगा- मॉम, आप बहुत सुन्दर हो !
और मैंने उनके होठों पर अपने होंठ रख दिए। थोड़ी देर तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे।
मॉम ने कहा- मादरचोद ! और कुछ भी करेगा या बस चूमेगा ही सिर्फ ?
तभी मैंने कहा- रुक जा रंडी ! अभी तेरी फाड़ता हूँ !
और मैं उनके पेटीकोट के अन्दर हाथ डाल कर उनके दाने को मसलने लगा और फ़िर उनका पेटीकोट उतार दिया, उनकी चूत को चूसने लगा और मैंने भी अपने सारे कपड़े उतार दिए और हम 69 की अवस्था में आ गए। अब मेरा मुँह और जीभ उनकी चूत चाट रही थी और वो मेरा लंड अपने मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी। थोड़ी देर में हम दोनों झड़ गए और वैसे ही लेट गए। उनकी चूत से गंगा-जमुना बह रही थी और क्या खुशबू आ रही थी।
थोड़ी देर में हम फिर तैयार थे।
उन्होंने कहा- अब देर मत कर और मेरी जवानी की प्यास बुझा दे !
तो मैंने अपने लंड का टोपा उनकी दोनों टांगों के बीच के गुलाबी छेद पर रख दिया। मैंने धीरे धीरे जोर लगाना शुरू किया।
वो बोली- दर्द हो रहा है !
कई दिनों से उन्होंने पापा के साथ सेक्स नहीं किया था तो बहुत दर्द हो रहा था।
मैंने कहा- थोड़ा दर्द होगा पर फिर मज़ा भी बहुत आएगा !
तो वो बोली- इस मज़े के लिए मैं कुछ भी सहने को तैयार हूँ !
वैसे भी उनकी चूत का पानी अभी तक रुका नहीं था सो चूत बहुत चिकनी हो रही थी। मैंने धीरे धीरे जोर लगाना शुरू किया, उनको थोड़ा दर्द हुआ पर जल्द ही मेरा लौड़ा उनकी चूत में उतर गया। उन्होंने मुझे कस कर पकड़ किया। अब मैं धक्के मार रहा था और वो चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी। बीच बीच में मैं उनके स्तन भी दबा रहा था। मुझको बिल्कुल जन्नत का सुख मिल रहा था। थोड़ी देर में उनका शरीर ऐंठने लगा और मुझको भी लगा कि मेरा माल निकलने वाला है, मैंने अपना लंड उनकी चूत से जैसे ही निकाला, उनकी पिचकारी छूट गई, वो झड़ चुकी थी, मैंने अपना लंड उनके मुँह में डाल दिया, फिर दो तीन झटकों के बाद मेरा सारा माल उनके मुँह में निकल गया। वो मेरा सारा पानी चाट गई और अपनी जीभ से मेरा लंड भी साफ़ कर दिया। अब मैं थोड़ा नीचे सरक कर उनके ऊपर लेट गया और उनके चुचूक मुँह में लेकर चूसने लगा।
थोड़ी देर बाद हमने एक बार और सेक्स का मज़ा किया और मैंने उनकी गांड भी मारी ज़िस कारण थोड़ी देर तक तो वो ठीक से चल भी नहीं पाई।
उस दिन हमने तीन घंटे सेक्स का बहुत मज़ा लिया। जब वो जाने लगी तो उन्होंने मुझसे कहा- मुझको पता नहीं था कि तुम ऐसे हो ! वर्ना पहले ही इसका मजा ले लेती ! अब जब भी मौका मिले, तुम मेरे शरीर से खेल सकते हो।
मैंने कहा- ठीक है मॉम !
मॉम ने- मॉम नहीं, अब मैं तुम्हारी जानू हूँ !
यह कह कर वो मुझे चूम कर जाने लगी। बाहर से किसी ने दरवाजा खटखटाया तो मैं और मॉम डर गए।
मॉम ने जाकर खोला तो दादाजी दरवाजे पर खड़े थे, वो कहने लगे- क्या कर रहे थे माँ बेटे अन्दर?
तो माँ ने बताया- मेरी कमर में दर्द था तो विशाल मुझे बाम लगा रहा था !
दादाजी ने कहा- मुझे चूतिया मत बनाओ, मैं सब देख रहा था बाहर से कि तुम दोनों क्या कर रहे थे अन्दर !
मैं और मॉम डर कर दादाजी को कहने लगे- दादाजी, इस बात को पापा से मत कहना !
दादाजी कहने लगे- तुम कर सकते हो ? मैं कह नहीं सकता ? एक शर्त पर नहीं कहूँगा !
हमने तुरंत कहा- क्या ?
दादाजी ने कहा- जो तुमने किया वो मैं भी करूँगा !
यह सुनकर तो मैं और मॉम दंग रह गए, लेकिन हमारे पास और दूसरा रास्ता नहीं था तो दादाजी की बात माननी पड़ी।
हाँ कहते ही दादाजी मॉम के होठों को चूमने लगे। थोड़ी देर तक चूमते रहे और बाद में बिस्तर पर लेटा दिया।
और उसके बाद उनके कपड़े उतार कर खूब चोदा मॉम को और यह सब मैं वहीं खड़ा होकर देख रहा था।
दादाजी खड़े हुए और कहा- मजा आ गया !
और मॉम ने भी कहा- अभी तो आपका लंड बहुत जवान है ! इसे पहले क्यों नहीं दिया ! आज मिले तो एक साथ दो दो ! अब तो हम रोज़ मस्ती करेंगे !
और हम तीनों हंसने लगे।
तभी दरवाजा किसी ने खटखटाया और हम तीनों डर गए कि अब कौन हो सकता है? तीनो के मन में सवाल आया कि तीसरा कौन?
दादाजी ने कहा- मैं खोलता हूँ !
दादाजी ने दरवाजा खोला तो देखा कि पापा आ चुके हैं और हम तीनों को बहुत गुस्से से देख रहे थे।
तभी मॉम हंसने लगी और बाद में पापा भी हंसने लगे।
मैं और दादाजी चौंक गए कि ये दोनों हंस क्यों रहे हैं।
तभी मॉम ने कहा- आप दोनों डरो मत ! इनको को सब पता है ! और यह सब इन्हीं की योजना थी।
तो दादाजी ने कहा- कैसी योजना?
मॉम ने बताया- विशाल के पापा मुझे सेक्स में संतोष नहीं दे पाते हैं, अब विशाल के पापा का खड़ा ही नहीं होता है, मैंने विशाल के पापा को अपनी यौन असन्तुष्टि की बात बताई तो इन्होंने कहा कि घर में जवान लड़का है तो बाहर जाने की जरुरत नहीं है, तुम उसी से काम चला लो ! और विशाल के पापा आज बाहर चले गए ताकि मैं विशाल को उत्तेजित करके उसके साथ सेक्स कर सकूँ। और यह आपको पता चल गया और मैंने सोचा कि कभी विशाल नहीं होगा तो आपसे काम चला लूँगी !
और हम सब हंसने लगे। उसके बाद मैं और दादाजी मॉम के साथ रोज़ सेक्स करते थे और खूब मजे करते थे।
तो दोस्तो, कैसी लगी आपको मेरी कहानी?